मूर्ख बातूनी कछुआ
एक तालाब में एक कछुआ रहता था। उसी तालाब में दो हंस तैरने के लिए उतरते थे। हंस बहुत हंसमुख और मिलनसार थे। कछुए और हंसो में मित्रता होते देर नहीं लगी। हंस रोज़ उस तालाब में आते और कछुए के साथ ढेरो बातें करके जाते। उनकी मित्रता में घनिष्ठा आ गयी। एक बार सूखा पड़ गया। तालाब का पानी सूखने लगा। पानी के सारे जीव तड़प तड़प कर मरने लगे। मछलियॉँ तो बिना पानी के मर गयी। कछुए को भी लगा कि वह बिना पानी के थोड़े दिनों में मर जायेगा। हंस अपने मित्र के पास आये और उसके जीवन के बचाव के बारे में सोचने लगे। दोनों हंस कछुए के बचाव के लिए कोसो कोसो दूर जाते। एक दिन हंस ने आकर कहा कि यहाँ से पचास कोस दूर एक झील है ,जहाँ पर तुम्हारा जीवन संभव है। कछुए ने कहा —-,” लकिन में इतनी दूर कैसे जाउगा?? ” हंसो ने कहा —-,” आखिर हमारी मित्रता किस दिन काम आएगी ? हम तुम्हे वहां तक
पहुँचाएगे। लकिन तुम्हे सारे रास्ते चुप करना होगा। कछुआ भी मान गया। हंसो ने लकड़ी ली और कछुए को बोलै –” अब तुम अपना मुँह बंद करके लटक जाओ। लकिन सारे रास्ते कुछ नहीं बोलोगे। ” कछुए ने ऐसा ही किया। रास्ते में जाते जाते एक गाँव आया , वहाँ के सारे लोग बहुत ही आश्चर्य से आकाश में देखने लगे कि ये क्या हो रहा है ? कछुए का ध्यान एक दम से नीचे गया और हंसो को बोला —“देखो , लोग हमे कैसे देख रहे है ?” जैसे ही उसने यह कहने के लिए मुँह खोला , वह नीचे गिर गया। उसे अपने मित्र की कही हुई बात याद नहीं रही और वो अपनी जान बचा नहीं पाया।
शिक्षा – बेमौके मुँह खोलना महंगा पड़ सकता है।
कपटी बगुला
एक वन प्रदेश में एक बहुत बड़ा तालाब था। उस तालाब में कई तरह के जीव जैसे -मछली ,पक्षी , कछुए , केकड़े इत्यादि रहते थे और उस तालाब में रहता था एक कपटी और आलसी बगुला। जिसे काम करना बिलकुल अच्छा नहीं लगता था ,यहाँ तक कि उसे अपने लिए शिकार करना भी बहुत भरी काम लगता था। कुछ न खाने की वजह से बगुला बहुत कमज़ोर हो गया। एक दिन केकड़ा बगुले के पास आया और पूछने लगा —” मामा क्या बात है ? आप इतने कमजोर कैसे होते जा रहे हो ? बगुले ने कहा कि अब तो उम्र हो गयी है। ज़िन्दगी में बहुत से शिकार कर लिए। अब तो शिकार करने का भी मन नहीं करता। ” केकड़ा कहने लगा —” अगर शिकार नहीं करोगे तो आप मर जाओगे। ” बगुले ने कहा —” तो क्या हो गया ? किसी की ज़िन्दगी छीनने का क्या फायदा ?? भगवान के घर जा के अपना मुँह भी तो दिखाना है। अब तुम देख ही रहे हो , मेरे पास कितने जानवर है ,लकिन किसी का शिकार नहीं कर रहा। ” केकड़ा बगुले की बातें सुनकर हैरान रह गया। उसने यह बात बाकी के तालाब के जीवो को बताई। सबके दिल में बगुले के लिए इज़्ज़त बढ़ गयी। सभी जीवो को बगुले के पास सुरक्षित महसूस होने लगा। सभी उसके पास आकर ढेरो बातें करते। एक बार सूखा पड़ने के कारण तालाब में पानी सूखने लगा। सभी मिलकर बगुला मामा के पास सहायता के लिए आये। बगुले ने कहा कि यहाँ से थोड़ी दूरी पर एक और तालाब है , मैं सबको वहां ले चलूँगा , लकिन मेरी उम्र होने के कारण में सबको एक साथ नहीं लेकर जा सकता। मैं एक एक करके सबको ले जा सकता हूँ। सभी खुश हो गए। बगुले ने रोज़ एक एक जीव को अपनी पीठ पर बैठा कर ले जाना शुरू किया। वह एक जीव को अपनी पीठ पर बैठाता , थोड़ी दूर पहाड़ी पर ले जाकर उन्हें मार देता और खा जाता। दिन बीतते गए , और बगुले की सेहत भी बनने लगी। सभी कहने लगे कि बगुले को दूसरो की सेवा करने का फल मिलने लगा है। यह सब सुनकर बगुला मन में हस देता कि दुसरो को बेवकूफ बनाना कितना आसान है। उस पहाड़ी पर हड्डियों के धीरे धीरे ढेर लगने लगे। एक दिन केकड़ा बगुले के पास आकर कहने लगा —,” मामा तुम सबको लेकर जा रहे हो , मेरी बारी कब आएगी ?” बगुला मन में हसने लगा और कहता अब मैं तुम्हे ही लेकर जाउगा। यह कहकर सोचने लगा कि जा बेटा जी अपनी एक दिन और ज़िन्दगी , कल तो में तेरे प्राण ले ही लूंगा। अगले दिन केकड़ा बगुले की पीठ पर बैठ कर चल दिया। रास्ते में एक पहाड़ी पर हड्डिया देख कर केकड़े का माथा ठनका। उसने बगुले से पूछा —” यह सब क्या है ?” तो बगुले ने कहा —,” ये सब तेरे ही दोस्त है। मैने सबको मार दिया है। अब तेरी बारी है। में किसी को भी दूसरे तालाब में छोड़ कर नहीं आया था। यह सुनते ही केकड़े ने बगुले का गाला दबा दिया और जान से मार कर उसका सर धड़ से अलग कर दिया। वह सर लेकर वापिस तालाब में गया और सबको बगुले की सच्चाई बताई। सबने केकड़े का धन्यवाद किया।
शिक्षा – हमे कभी भी बिना किसी पर आँखें बंद करके विशवास नहीं करना चाहिए।
बुद्धिमान खरगोश
एक वन में एक शेर जब भी अपना शिकार करने के लिए जाता , बहुत सारे जीवो को मार देता। सभी जीव वन में बहुत डरे डरे रहने लगे। एक दिन जंगल के जानवरो ने मिल कर शेर से विनती की कि हम अगर क्रम से आपको अपने आप ही प्रत्येक दिन कोई न कोई जीव यदि भेज दे तो आपको भी बैठे बिठाये शिकार मिल जायेगा और हमारे जीव भी कम मरा करेंगे। शेर को उनका परामर्श अच्छा लगा और उनकी बात मान गया। अब प्रत्येक दिन शेर को बैठे शिकार मिलने लगा। वन में सभी जीव भी निर्भय होकर रहने लगे। एक दिन खरगोश की बारी आयी। उसके डर के मारे पैर आगे नहीं बढ़ रहे थे। वह जंगल में इधर उधर घूमने लगा। रास्ते में उसे कुआ दिखाई दिया। कूए को देखते ही उसके दिमाग में तरकीब आई। वह जैसे ही शेर के पास पहुंचा , शेर ने क्रोध से कहा —,” तुम इतनी लेट क्यों आये हो ? पता नहीं मैं कितना भूखा बैठा हूँगा। कल से में खुद हे जंगल में जाऊंगा और अपना शिकार स्वयं ही करुगा। वैसे भी आज जंगल वालो ने मुझे मेरा शिकार बहुत छोटा है , जिससे मेरा पेट नहीं भरेगा। ” खरगोश ने बड़ी चतुराई से कहा —-,” हे स्वामी ! पांच खरगोश भेजे थे आपके लिए , लकिन रास्ते में एक कुए में एक और शेर मिल गया , जिसने मेरे चारो साथियो को खा लिया। हमने कहा भी हम अपने राजा शेर का आहार है और उनके पास ही जा रहे है। ” फिर उसने क्या कहा ??”— शेर ने पूछा। यह सुनकर उसने छोड़ दिया और मुझे कहा —,” जाओ ! और जाकर अपने स्वामी को कहो कि यह जंगल मेरा है और कल से मेरे लिए ही आहार आया करेगा। ” यह सुनकर शेर आग बबूला हो गया और कहने लगा —,” चलो मुझे उसी शेर के पास ले चलो , आज तो जंगल में या तो में रहूँगा या वो। ” खरगोश उसे उसी कुए के पास ले गया और नीचे देख कर बोला —-,” स्वामी ! वो शेर वही रहता है। ” यह सुनकर शेर पानी में देखकर ज़ोर से गुर्र्या उसे पानी में उसी की परछाई नज़र आयी। परछाई देखते ही वह दूसरे शेर को मारने के लिए पानी में कूद गया और डूब कर मर गया। खरगोश ख़ुशी ख़ुशी वापिस आ गया और उसने यह सारी बात जंगल में सारे जीवो को बताई। सभी यह सुन कर खुश हुए और खरगोश की बुद्धिमत्ता की प्रशंसा करने लगे।
शिक्षा – बुद्धिमानी से अपने से शक्तिशाली को पराजित किया जा सकता है।