परी कथाएं : Do You Want to read Best 5 परी कथाएं ?

परी कथाएं , ऐसी कहानिया जिसे हम जितनी भी उम्र हो जाए , लेकिन उसे पढना हमे उतना ही अच्छा लगता है , जितना एक छोटे बच्चे को | चलिए आज एक यात्रा करते है , उन परी कथायो की , जो हमे फिर से बचपन के दौर में ले जायेगे | यहाँ पर आपको Best 5 परी कथाएं मिलेगी , जो यक़ीनन आपको आपके दादी नानी की कहानियो के ज़माने में ले जाएगी |

                                              Best 5  परी कथाएं

                                                     परी कथाएं -1

     

       लालची  इंसान

परी कथाएं
परी कथाएं

 

 एक बार की  बात है ——किसी राज्य का में एक अमीर आदमी हुआ करता था।  वह स्वभाव से बहुत लालची हुआ करता था।  उसके पास किसी धन -धान्य  कमी नहीं थी , लकिन फिर भी उसके मन में और पैसा पाने की बहुत लालसा थी। वह अपने परिवार से ज्यादा अपने पैसे से बहुत प्यार करता था। एक बार उसने और धन पाने के लिए भगवान् की घोर तपस्या की।  भगवान् जी ने खुश होकर उसे कोई वर मांगने के लिए कहा।
  उसने कहा —–” हे प्रभु ! में जिस वस्तु को भी हाथ लगाऊ , वह सोना बन जाए। ” भगवान जी ने कहा —-” तथास्तु। ” वह ख़ुशी के मारे पागल हो गया की अब वह संसार का सबसे अमीर इंसान बन जाएगा।  ख़ुशी ख़ुशी घर लौट कर आया , उसने अपना वर का इम्तेहान लेने के लिए पहले घर के मेज पर हाथ रखा और वो देखते ही देखते सोना बन गयी। फिर  उसने घर में पड़े हुए कांच के पुतले पर हाथ रखा वह भी सोने का बन गया।
उसके पाँव ख़ुशी से  जमीन पर नहीं लग रहे थे।  उसने देखते ही देखते घर के सारे समान को सोने में तब्दील  कर दिया। जब उसे अपने वर का इस्तेमाल कर के संतुष्टि मिली तो उसने अपने खाने के लिए पकवान मंगवाए। जैसे ही उसने खाने के लिए निवाला मुँह में डाला वह सोने की बन गयी।
वह देख कर आश्चर्य चकित रह गया।  फर उसने जैसे ही  पीने के पानी का गिलास उठाया तो वो भी सोने का बन कर रह गया। उसे देख कर बहुत ही दुःख हुआ।  उसने दुखी हृदय से अपनी पत्नी को आवाज़ लगाई। उसकी पत्नी के आने पर उसने उसका हाथ पकड़कर जब अपना दर्द बताना चाहा तो वो भी सोने के पुतले में तब्दील हो गयी।  अपनी बेटी के सिर पर भी गलती से हाथ लगने पर सोने की बन गयी।  वह बिलकुल अकेला रह गया।
उसके पास कोई नहीं था , सिवाय सोने के पुतलो के।  उसे अपनी गलती का एहसास हो गया।  उसने भगवान् जी से प्रार्थना की , अपनी गलती की क्षमा मांगी और अपना वर वापिस लेने की कामना की।  भगवान् जी ने अपना वर वापिस ले लिया और उसके साथ साथ यह भी वायदा लिया कि वह आगे से कभी भी लालच नहीं करेगा। उसके वायदा करते ही सब कुछ पहले जैसी ही वस्तुओ में तब्दील हो गया।  उसने अपनी पत्नी और बेटी को गले लगाया और भगवन जी का धन्यवाद किया।

शिक्षा —– लालच बुरी बला है।  

                                             परी कथाएं -2

      जादुई  आइना

Witch, Witchcraft, Broomstick, Broom

एक बार की बात है कि एक जादूगरनी  हुआ करती थी। उसके पास एक जादुई आइना हुआ करता था ,जो यह बताता था कि पूरी दुनिया में सबसे सुन्दर कौन है ? जब भी वह सुन्दर से कपडे पहन कर तैयार होती और आईने के सामने जा कर पूछती ———” आइना आइना यह बतला——दुनिया में सबसे सुन्दर नारी कौन  सी है ?” आइना हमेशा उसी का चेहरा दिखता।  यह देख कर वह खुश हो जाती।  उसे अपने आप पर गर्व महसूस होने लगा।

इसी तरह दिन बीतते गए।  वह आईने के सामने जाती और आइना उसी का चेहरा सबसे खूबसूरत बताता।  और एक दिन वह रोज़ की तरह आईने के सामने गयी —-और बोली —”  आइना आइना यह बतला——दुनिया में सबसे सुन्दर नारी कौन  सी है ?” आईने ने उसका चेहरा न दिखा कर किसी राजकुमारी  का चेहरा दिखा दिया। ” वह अचंभित रह गयी।  उसने दोबारा से फिर पूछा —”  आइना आइना यह बतला——दुनिया में सबसे सुन्दर नारी कौन  सी है ?”

आईने ने फिर से वही राजकुमारी का चेहरा दिखा दिया।  जादूगरनी  क्रोधित हो उठी।  उसे उस राजकुमारी से जलन होने लगी। वह तिलमिला उठीऔर फिर से सबसे खूबसरत बनने के बारे में सोचने लगी। जादूगरनी  के मन में  कपट आ गया।  उसने अपने जादुई आईने से फिर पूछा —” आईने आईने ले चल वहाँ मुझे ,जहां वो राजकुमारी है। जादूगरनी पल भर में वहां पहुँच गयी।  वहां उसने देखा कि वह किसी राज कुमार के साथ बैठी हुई है।

जादूगरनी वही पर खड़ी होकर राजकुमारी के पास पहुँचने  का अवसर देखने लगी। थोड़े समय बाद राजकुमारी ने राजकुमार से कहा कि उसे भूख लगी है। राजकुमार राजकुमारी के लिए  खाना खोजने चला गया और अवसर पाते ही जादूगरनी राजकुमारी के पास एक बूढी औरत का रूप धारण करके गयी और बोली —” बेटी ! तुझे भूख लगी है न !!!!! ये ले सेब खा ले। ” राजकुमारी ने उसके हाथो  से  सेब ले लिया और जैसे ही पहला निवाला मुँह में डाला राजकुमारी बेहोश हो गयी।

उसी समय राजकुमार वहां आ गया।  जैसे ही जादूगरनी वहां से भागने लगी राजकुमार ने उसे बंधी बना लिया  और जाने नहीं दिया।  राजकुमार ने उससे ये सब करने का कारण पूछा तो जादूगरनी ने सारी  बात बताई।  राजकुमार को उसकी बात पर विशवास नहीं आया और उसने जादूगरनी से जादुई आइना दिखने के लिए कहा।  जैसे हे जादूगरनी ने आइना दिखाया——–राजकुमार ने वो आइना तोड़ दिया।  आइना टूटते ही राजकुमारी को होश आ गया।

जादूगरनी ने अपने किये पर क्षमा मांगी और अपने आप को बंधी मुक्त करने का आग्रह किया।  राजकुमार ने कहा कि वह तभी उसे बंधी मुक्त करेगा जब वो ऐसा कभी न करने का वायदा करेगी।  जादूगरनी ने ऐसा कभी न करने का वचन दिया और वापिस लौट गयी।

शिक्षा – हमे कभी भी किसी से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।

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                                        परी कथाएं -3

        जादुई  झरना

Fantasy, Landscape, Waterfall, Figure, Face, Rock

एक बार की बात है कि एक गांव में दुखीराम नाम का आदमी हुआ करता था।  जिससे हर काम में कोई न कोई गलती हो जाय करती थी।  वह अपनी ज़िन्दगी से बहुत परेशान था।  कि उससे कोई भी काम अचे से नहीं होता।  सभी लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे।  वह एक कपडे की दूकान में काम करता था।

उस दूकान का मालिक भी उसे बहुत ताने मारता था कि वह एक भी काम ढंग का नहीं कर सकता।  एक दिन वह अपनी ज़िन्दगी से तंग आ कर अपना जीवन समाप्त करने  एक झरने में जा रहा था कि वह उसे एक साधु मिल गए और पूछने लगे कि वह इस झरने के पास क्या कर रहा है ? उसने अपनी साड़ी गाथा सुनाई। साधु ने कहा कि यह तो एक जादुई झरना है , इसमें रात के समय  तीन डुबकी लगाते ही तुम्हारे सभी  जायेगे।

दुखीराम बहुत ही उत्सुकता से रात होने का इंतज़ार करने लगा। जैसे ही रात हुई , वह तीन डुबकी लगाने के लिए झरने के पास पहुँच गया।  उसने तीन डुबकी लगाई।  जैसे ही डुबकी लगाने के बाद वह बाहर आया उसे अपने में  बहुत ही परिवर्तन नज़र आया।  अगले दिन दुखीराम सुखीराम में परिवर्तन हो गया।  उससे सारे काम ठीक हो रहे थे।  वह पूरे आत्म विशवास के साथ कपड़ो की दूकान में गया।  वह पर उसके अचे और बदले बर्ताव से दूकान का मालिक बहुत प्रसन्न हुआ।

देखते ही  देखते सुखीराम के सारे बिगड़े काम बनने लगे।  थोड़े समय बाद सुखीराम ने अपनी भी कपड़ो की दूकान खोल ली और उसकी शादी हो गयी।  वह अपनी पत्नी और अपने लड़के के साथ ख़ुशी ख़ुशी जीवन व्यतीत करने लगा।  वह अपने परिवार को भी एक दिन जादुई झरने पर ले कर गया।  वहां जा कर उसी साधु से मिला और कहने लगा कि वह आज अपने परिवार को भी जादुई झरने में डुबकी लगवाने के लिए लाना चाहता है।

साधु ने आश्चर्य हो कर पूछा —” कौन  सा जादुई झरना ???? यहाँ पर तो कोई जादुई झरना नहीं है।  ” सुखीराम ने याद करवाया  कि साधु  जी में सुखीराम हूँ ,जिसका जीवन आपने बदल दिया था।  साधु ने मुस्कुरा कर कहा —” हाँ सुखीराम , मुझे सब कुछ याद है। लकिन यह भी सच है कि यह कोई जादुई झरना नहीं है। इंसान वैसे ही जीवन व्यतीत करता है जैसा वो अपने आप में महसूस करता है। ” यह सुन कर सुखीराम आश्चर्यचकित रह गया।

शिक्षा – हम वैसा ही जीवन व्यतीत करेंगे , जैसा हम सोचते है.

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