हिन्दू धर्म में दशहरा की मान्यता

                                       दशहरा

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दशहरा भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की विजय का  प्रतीक माना जाता है। इसीलिए यह त्यौहार विजय दशमी के  नाम से भी जाना जाता है। यह त्यौहार भारत में तो पूरे जोश , हर्षोलास और उत्साह के साथ मनाया जाता है , अपितु भारत से बाहर रहने वाले भारतीय भी इसे पूरे जोश के साथ मनाते है।
                                           

                             दशहरा की विभिन्न मान्यताये

हिन्दू मान्यता के अनुसार इस दिन  श्री राम ने रावण का वध किया था और दुर्गा माँ ने महिषासुर का वध किया था। इसलिए इस दिन शस्त्र पूजन भी किया जाता है। प्राचीन काल में राजा महाराजा विजय की प्रार्थना कर रन भूमि में युद्ध के लिए निकलते थे। हिन्दू मान्यता के अनुसार रावण के दस सिर पापो -काम , क्रोध ,लोभ ,मोह मद ,मत्सर ,अहंकार ,आलस्य ,हिंसा और चोरी जैसे अवगुणो को छोड़ने की प्रेरणा हमे देता है।

                                  फसल की पूजा

भारत एक कृषि प्रधान देश है।  एक किसान को सबसे बड़ी ख़ुशी उसकी फसल में होती है , जब किसान अपनी सुनहरी फसल उगाकर अनाज रुपी सम्पति घर लाता है ,उस दिन वह सातवे आसमान पर होता है।  इस को वह भगवान की अत्यंत कृपा मानता है और भगवान की कृपा जाहिर करने के लिए वह उस दिन अपनी फसल की पूजा करता है।

                     रामलीला के रूप में दशहरा 

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भारत केभिन्न भिन्न राज्यों में दशहरा धूम धाम से मनाया जाता है। दशहरा से कुछ दिन पहले ही विभिन्न शहरों के मैदानों में मेले व् राम लीला आरम्भ हो जाती है।  विभिन्न जगहों पर रावण , कुम्भकरण और मेघनाथ के पुतले बना कर दहन किया जाता है। 

                     दुर्गा पूजा के रूप में दशहरा 

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भारत के विभिन्न राज्यों में जहा राम लीला मनाई जाती है , वही इस दिन दुर्गा पूजा भी की जाती है।  दुर्गा पूजा पर दुर्गा माँ की मूर्ति को आकर्षक ढंग से सजा कर श्रद्धा पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है। 

                    दशहरे की सम्बन्धित कहानी 

हिन्दू मान्यता के अनुसार श्री राम को जब बनवास हुआ तो उनके साथ उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी बनवास काटने के लिए चले गए।  एक दिन लंकापति रावण धोखे से सीता माता का हरण करके ले गया। श्री राम ने वानरों की सेना की सहायता से लंकापति रावण का वध कर दिया और सीता माता को उसके शिंकजे से बाहर  निकाला।  इसीलिए इसे बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता  है और विजय दशमी के नाम से पुकारा जाता है। 

                                             

                                             
                                             

                                     

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