Ghar yaad aata hai mujhe

Ghar yaad aata hai mujhe
घर याद आता है मुझे
सुबह जब खुली मेरी आँखें
इधर उधर देखा , कुछ ढूँढने की करी कोशिश
फिर एहसास हुआ अकेले साए का
तभी टीस सी उठी सीने में
भर गई आँखें आंसू से
कि  जरुरतो ने दूर कर दिया अपनों से
लेकिन घर याद आता है मुझे |

सारा दिन तो बीत जाता है
अपनी ज़िन्दगी की ज़रुरतो को पूरा करने में
जब भी घर जाने का समय आता है
पैर आगे नहीं बढ़ पाते है
घर वालो की याद मन को सताती है ,
और दिल की हर सांस से यही आवाज़ आती है
घर याद आता है मुझे |

सुबह उठ कर नौकरी का जब समय आता है
माँ के हाथो का बना खाना बहुत याद आता है
अब कहाँ खाली पेट सुबह काम को निकल जाते है
माँ का पीछे पीछे भागते हुए टिफ़िन देना बहुत याद आता है
सच्ची कहता हूँ माँ
घर याद आता है मुझे |

शाम को घर आकर जब खोला दरवाज़ा
एक अकेला साया देखकर
मन को जब अकेलेपन का एहसास हुआ
भाई बहनों के साथ बिताया हुआ
जब आया याद बचपन
तभी ये एहसास हुआ कि
घर याद आता है मुझे |

अपनी हर छोटी से छोटी जरुरत
पिता को आकर बतानी
हक से उनसे जेब खर्ची मांगनी
लेकिन आज जब खुद ही
सब खर्च करना पड़ता है
पिता के साथ का एहसास मन को खाता है
और घर याद आता है मुझे

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