Gumnam Shayari in Hindi

ज़िन्दगी ज़िन्दगी ढूँढता रहा एक गुमनाम रास्ते पर
लेकिन मंजिल कहीं न मिली
न मिला कोई ठिकाना
एक पल के लिए आँखें बंद की
और लगा सोचने कि क्या मिला इस ज़िन्दगी से
क्या में ओर पाना चाहता हूँ
बस एक ही आवाज़ आई अंदर से
जितना दौड़ेगा किसी चीज़ के पीछे
उतना ही दूर चली जाएगी
यदि करेगा कोशिश उसे आराम से पाने की
खींच के तेरे पास चली आएगी |
क्यों चल पड़ा में गुमनाम रास्ते पर
पता नहीं क्या में पाना चाहता था
दूर की मंजिल खोजते खोजते
सामने वाला रास्ता भूल गया
में अनजाना चल पड़ा नए रिश्ते बनाने के लिए
अपने रिश्ते , परिवार , प्यार कहीं खो दिया
चला था कहीं अनमोल खजाना बनाने
लेकिन अपने ही रिश्तो को दाव पे लगा दिया |
सुनहरा भविष्य बनाने का देखा था इक सपना
लेकिन गुमनाम वर्तमान में खो कर रह गया
चला था अकेले सफलता की राह पर
अपनों को पीछे छोड़ दिया
ज़िन्दगी में ठोकर खाई तो समझ में आया
जिनको छोड़ कर बड़ा था आगे
उन्होंने ही साथ निभाया
मिल ही जानी थी मंजिल मुझे अपनों का साथ पाकर
जब दी ज़िन्दगी ने ठोकर तो समझ में आया |
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