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Hindi Story for kids – kaanch ka rang
काँच का रंग हिंदी कहानी है, जिसे होली के त्यौहार से जोड़ कर बच्चो को बडो की बात मानने की शिक्षा दी गई है, तो आईये पढ़ते है Hindi Story for kids – kaanch ka rang.
कुछ दिनों में होली का त्यौहार आने वाला था |देवा और मोंटी दोनों भाई बहुत खुश थे | वह दोनों भाई बहुत शरारती थे | सारा दिन मस्ती करते रहते और अपने मम्मी पापा की कोई बात नहीं मानते थे | हमेशा कोई ना कोई शरारत करने के बारे में सोचते रहते थे|
उसके पिता रंगों और मिठाइयों की दुकान लगाया करते थे और मां घर का कामकाज देखती थी| उनके पिता को दोनों बच्चों की चिंता लगी रहती थी | होली का त्योहार भी पास था तो उनके पिता को रंगों की दुकान लगाने की तैयारियां भी करनी थी और दोनों बच्चों को भी समझाना था कि शरारत करना छोड़ दो| पिता ने अपने दोनों बच्चों को बुलाया और कहा -” देखो बच्चों ! मेरी बात ध्यान से सुनो अगर आज के बाद तुमने कोई शरारत करी तो मैं तुम दोनों का खेलना कूदना बंद करवा कर तुम दोनों को दुकान पर बैठा दूंगा |
“नहीं , पिताजी हम आज के बाद कोई शैतानी नहीं करेंगे और मां को भी परेशान नहीं किया करेंगे |”
मां -” देवा मोंटी मैं तुम्हारे लिए खीर बना कर लाई हूं |आओ, फिर खीर खा लो और आज के बाद कोई शैतानी मत करना |”
” ठीक है माँ , नहीं करेंगे लाओ और फिर खीर तो दो ना मां बहुत जोर से भूख लग रही है|”
पिता-” क्या तुम्हें लगता है ? यह दोनों भाई सुधर जाएंगे और हमारी बात भी मान लेंगे| ”
“हां क्यों नहीं ,बिल्कुल मानेंगे हमारे बच्चे बहुत अच्छे हैं और हमारा खूब नाम रोशन करेंगे|”
पिता -“हां ! भगवान करे ऐसा ही हो और यह वक्त रहते सुधर जाए |वरना इन के सामने कभी कोई बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी |”
“अब आप जाइए और रंग ले आइए होली आने वाली है आपको दुकान भी तो लगानी है और दुकान में साफ-सफाई भी करनी है|”
पिता -” हां हां जाता हूँ | शुक्र है ! भगवान का जो तुम मुझे हर चीज वक्त पर ध्यान दिला देती हो |”
“मोंटी अब से हम कोई भी शरारत नहीं करेंगे| वरना पिताजी हमें दुकान पर बैठा देंगे |”
“हां भाई और हमारा खेलकूद भी बंद करवा देंगे| मैं भी अब से कोई शरारत नहीं करूंगा |
देवा -” और अगर हमारा खेलकूद बंद हो गया तो हमारे दोस्त हमारा कितना मजाक उड़ाएंगे | सब हँसेगे हम |”
मोंटी -” और कोई हमसे बात भी नहीं करेगा| देवा और वह हमें चिड़ाया करेंगे |”
मोंटी-” हमारी भलाई इसी में है कि हम मां और पिताजी की सारी बातें मानने लग जाए |”
पिता -“अरे राजू भैया ! होली आने वाली है, रंग दे दो मुझे दुकान लगानी है|”
राजू -“भाई, अभी देता हूं |पर उससे पहले मैं तुम्हें एक चीज दिखाता हूं |”
पिता -“ऐसा क्या दिखाना है?”
राजू-” यह देखो कांच वाला रंग |यह चाइनीस रंग है| इसमें छोटे-छोटे बहुत बारीक कांच मिले हुए हैं| जिसके भी लगेगा बहुत जलन करेगा और आजकल यह बिकेगा भी |”
पिता-,” राजू तुम्हें शर्म आनी चाहिए |हमारे देश में त्यौहार खुशियां बांटने के लिए बनाए जाते हैं | किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं |”
राजू -“मुझे माफ कर दो मनदीप भाई| मैं आज के बाद कोई ऐसा सामान नहीं बेचूंगा ,जिससे किसी को नुकसान पहुंचे |”
पिता -“और तुम्हें पता है ना चाइनीस माल को इस्तेमाल करना और बेचना नहीं चाहिए |राजू पर क्यों ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए?”
पिता-” क्योंकि बाहर के सामान को खरीद कर हम अपना पैसा बाहर भेज रहे हैं और दूसरे देश को अमीर कर रहे हैं |”
राजू -“ऐसा है क्या ?”
पिता-” हां बिल्कुल और तो और हमें सिर्फ अपने देश के सामान को ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे हमारा पैसा हमारे देश में ही रहेगा और हमारे देश की तरक्की भी होगी और इससे मेक इन इंडिया भी प्रमोट होगा|”
“ठीक है भाई, मैं आपकी बात समझ गया| अब मैं इस रंग को नहीं बेचूंगा और इसको वापस भी कर दूंगा|”
पिता-” हां ठीक है , ऐसा ही करना |”
राजू-” लाओ, अपना थैला दो और बताओ आपको कौन-कौन से रंग चाहिए? मैं देता हूं|मंदीप बहुत से रंग पिचकारी गुब्बारों का नाम बताता है और राजू सारा सामान उसके थैले में डाल देता है | पर गलती से राजू सादे गुलाल की जगह मनदीप के थैले में कांच वाला गुलाल डाल देता है|”
अब मनदीप सामान लेकर राजू को पैसे दे देते हैं और अपने घर की ओर चल देते हैं | घर पहुंचकर वह अपने बच्चों को अपनी मदद कराने के लिए बोलते हैं|
“देवा, मोंटी मैं वापस आ गया हूं| अब चलो मिलकर सामान दुकान में लगाते हैं, फिर दुकान भी तो लगानी है|”
देवा मोंटी -“हां पिताजी! चलो चलिए |”
पिता और बच्चे दुकान में सारा सामान ले जाते हैं और पहले पूरी दुकान की साफ सफाई करते हैं और फिर थैले में से एक-एक करके सारा सामान निकालते हैं| पिताजी की नजर उस कांच वाले गुलाल पर पड़ती है जो राजू ने गलती से उसको दे दिया था|
पिता-” अरे! यह तो राजू ने मुझे कांच वाला गुलाल दे दिया| इसको मैं वापस करके आता हूं|”
देवा-” पिता जी आपने क्या कहा ? कांच वाला गुलाल”
मोंटी-” पिता जी यह कैसा गुलाल है ?”
पिता -” बच्चों कांच का यह गुलाल बहुत नुकसानदायक है और यह गुलाल जिसको भी लगाएंगे उसको काफी जलन होगी और चोट लग जाएगी |”
मोंटी-” ऐसा क्या पिताजी?”
पिता -” हां मैं अभी जाता हूं और इसको वापस करके आता हूं |”
देवा -” पिताजी आप थक गए होंगे तो ऐसा करो इसको अलग रख दो और शाम को वापस कर आना |अभी आराम कर लो|”
पिता -“हां बेटा मैं थक तो बहुत गया हूं| तुम सही कहते हो | मैं इसको शाम को वापस कर आऊंगा | अभी थोड़ा आराम कर लेता हूं, पर हां बच्चों तुम में से कोई इस रंग को मत लेना|”
देवा मोंटी -” हाँ पिताजी, हम नहीं लेंगे | इतना कहकर पिता और दोनों बच्चे सारा सामान दुकान में लगाकर और उस कांच का रंग को अलग रखकर थोड़ी देर आराम करने चले जाते हैं | पर जब सब आराम करने चले जाते हैं तो मोंटी के मन में फिर से खुराफात चलने लगती है| वह चुपचाप आकर उस कांच वाले रंग में से थोड़ा सा रंग निकाल कर अपने पास रख लेता है और मन ही मन सोचता है, यह रंग मै अपने उन दोस्तों को लगाऊंगा जो मुझे बहुत परेशान करते हैं| शाम को पिताजी रंग को वापस कर के दूसरा रंग ले आते हैं |
अब होली का दिन आ गया| पिताजी दुकान में रंग बेच रहे थे | मां रसोई में मिठाई बना रही होती है और देवा और मोंटी होली खेलने के लिए कुर्ता पजामा पहन कर बाहर जाने के लिए तैयार थे और मोंटी ने अपने हाथ में वह कांच वाला रंग भी ले लिया | अचानक माँ देवा मोंटी के पास आती है और उन्हें मिठाई देती है खाने के लिए| मैंने तुम्हारे लिए मिठाई बनाई है| बाहर जाने से पहले ही खाते जाओ मिठाई खाने के चक्कर में भूल जाता है कि उसके हाथ में जो रंग है वह कांच वाला है | मिठाई खाने के बाद जब वह बाहर जाने लगते हैं तो वह बोलती है —–
मां-” बच्चों ! बाहर जाने से पहले तुम दोनों भाई भी एक दूसरे के साथ होली खेल लो |”
मोंटी -” सही कहा माँ आपने|”
मोंटी -” यह लो देवा मेरे रंग में से मुझे कुछ रंग लगा दो|”
“हां भाई अभी लगाता हूं|”
जैसे ही देवा मोंटी के रंग में से मोंटी को रंग लगाता है तो मोंटी जोर जोर से चिल्लाने लगता है|
मोंटी का पूरा चेहरा जल जाता है| जलन भी करने लगता है|
मां-” अरे सुनते हो जल्दी आओ इसको क्या हो गया है?”
पिताजी जल्दी से भाग कर आते हैं|
पिता-” क्या हुआ ?क्या हुआ? यह देखिए ना देवा ने जैसे ही रंग लगाया मोंटी को क्या हो गया |”
पिताजी जल्दी से उनके हाथ और मुंह पानी से धोते हैं और उसके बाद डॉक्टर के पास उनको लेकर जाते हैं| डॉक्टर को दिखाने के बाद तीनों घर आते हैं तो पिताजी बहुत गुस्से में होते हैं और चिल्ला कर बोलते हैं —-
पिता -“यह कांच वाला रंग कौन और कहां से लाया?”
मोंटी रोने लगता है| पिताजी मैंने कुछ नहीं किया| मोंटी रोते-रोते सारी बात सच-सच बता देता हैं और फिर उसके बाद पिताजी मोंटी पर और बहुत गुस्सा होते हैं और बोलते हैं -“क्या तुम जानते हो ?अगर आज मैं और तुम्हारी मां घर पर नहीं होते तो क्या हो सकता था ?फिर पिताजी मोंटी को प्यार से समझाते हैं कि बेटा हमें अपने से बड़ों की बात माननी चाहिए |अगर तुम आज मेरा किसी और बच्चे को लगा देते तो क्या होता|
अब मोंटी अपनी गलती पर शर्मिंदा था और पिताजी से रो-रोकर माफी मांगने लगता है| पिताजी की आंख में आंसू देख कर उसको माफ कर देते हैं और मोंटी को अपने गले से लगा कर बोलते हैं _”आज के बाद ऐसा कुछ मत करना जिससे तुम्हें और किसी और को चोट पहुंचे और हमेशा याद रखना होली खुशियों का त्योहार है ना की किसी को नुकसान पहुंचाने का |”
शिक्षा-” त्योहार खुशियों के प्रतीक होते हैं| मिलजुलकर मनाना चाहिए और यह कोशिश करनी चाहिए कि हमारी वजह से किसी को नुकसान ना पहुंचे |”
Happy Holi
