Hindi Story for Kids with moral

Hindi Story for Kids with moral

जादुई चक्की

एक गाँव में दो भाई रहते थे – राम लाल और श्याम लाल | राम लाल रिश्ते में तो बड़ा भाई था , लेकिन नियत का साफ़ नहीं था | बचपन से ही जब भी दोनों भाई के लिए कोई भी चीज़ आती थी तो राम लाल श्याम लाल से छीन लेता था | श्याम लाल रिश्ते में तो छोटा था , लेकिन दिल का बहुत साफ़ था |बड़े भाई द्वारा उसकी चीज़ छीन लेने पर भी मन मैला नहीं करता था |

देखते ही देखते दोनों भाई बड़े हो गये | सोच अलग अलग होने के कारण दोनों भाइयो के बीच टकराव बढता ही चला गया | जब दोनों भाइयो के बीच टकराव अंतिम चरण पर पहुँच गया तो पिता ने सोचा , ” क्यों न दोनों भाइयो के बीच बटवारा कर दिया जाये |” जब यह बात राम लाल को पता लगी तो उसने श्याम लाल का हिस्सा भी धोखे से ले लिया |

लेकिन श्याम लाल ने फिर भी कुछ नहीं कहा और चुप चाप अपने बीवी बच्चो को लेकर घर छोड़ कर चला गया | अलग होने के बाद राम लाल तो ऐशो आराम से जी रहा था , लेकिन श्याम लाल के पास कोई काम न होने के कारण उसके घर का गुजारा बड़ी मुश्किल से चल रहा था | दिनों भूखे रह कर गुजारा करना पड़ता | घर में अन्न , चावल , दाल का कोई दाना नहीं था | अपने घर वालो की बुरी हालत देख कर श्याम लाल बहुत दुखी होता , लेकिन कुछ कर नहीं पाता | यह देख कर उसके पिता भी बहुत दुखी होते , लेकिन वह भी कुछ नहीं कर पाते |

एक दिन उसके पिता की तबियत बहुत ख़राब हो गयी | उसने श्याम लाल को अपने पास बुलाया और उसे जादुई चक्की दी और कहा कि यह चक्की अपने पास रखना और राम लाल को बिना बताये अपने घर ले जाना | जब भी तुम्हे इस चक्की से कुछ माँगना हो तो इसे चला कर मांग लेना , यह चक्की तुम्हे निकाल कर दे देगी , लेकिन एक बात का ध्यान रखना , जब तक इस पर लाल रंग का कपडा नहीं डालोगे यह चक्की काम करना बंद नहीं करेगी | यह कहते ही उसके पिता की साँसे बंद हो गयी |

श्याम लाल यह चक्की लेकर घर चला गया | घर पर सभी भूखे बैठे उसकी राह देख रहे थे कि शायद श्याम लाल कुछ खाने को लेकर आएगा , लेकिन जब वह खाने की बजाय चक्की लेकर आया तो सबका दिल टूट गया | श्याम लाल ने चक्की रखी और उसे चला कर चावल मांगने लगा | सभी देख कर आश्चर्य चकित रह गये कि आखिर श्याम लाल कर क्या रहा है ? चक्की ने चावल निकलने शुरू कर दिए | सभी यह देख कर हैरान तो हुए लेकिन साथ साथ खुश भी हुए कि आज तो भर पेट खाने को मिलेगा |

फिर दाल , गेहूं और जरुरत वाली चीजों की मांग करके राशन इक्कठा किया और सभी ने भर पेट खाना खाया | फिर श्याम लाल के दिमाग में आया क्यों न यह राशन इक्कठा करके बाज़ार में बेचा जाए | श्याम लाल की यह तरकीब बहुत काम आई और देखते ही देखते बहुत अमीर हो गया | उसने नया घर बनाया ,बच्चो को अच्छे स्कूल में पढने भेजा , बीवी को नये कपडे , गहने लेकर दिए और शाही ठाठ बाठ से रहने लगा | उसने इतना पैसा इक्कठा कर लिया कि वह कोई भी काम शुरू कर सकता था और चक्की के बिना भी अपना जीवन निर्वाह कर सकता था | राम लाल से अपने भाई की तरक्की देखी न गयी | एक दिन वह श्याम लाल के घर के बाहर खड़ा होकर देखने लगा कि आखिर श्याम लाल के पास इतना सामान आता कहाँ से है ?

अचानक राम लाल ने देखा श्याम ने चक्की  चला कर जो भी सामान मांग रहा है , चक्की उसे निकाल कर दे रही है | यह देख कर राम लाल ने सोचा कि यदि यह चक्की मुझे मिल जाए , में तो और भी अमीर हो जाऊँगा | एक दिन मौका पाकर राम लाल वह चक्की चुरा कर ले आया | उसने अपने पत्नी और बच्चो को अपने साथ लिया और नगर को छोड़ कर जाने आगा | सागर तट पर पहुँच कर एक नाव में बैठ कर जब थोड़ी दूर पहुंचा तो उसके दिमाग में आया ” क्यों न इस चक्की को चला कर देखा जाए ?”

यह सोचते ही वह चक्की से चावल मांगने लगा | चक्की ने चावल निकालने शुरू कर दिए , लेकिन चक्की को बंद कैसे करना है , यह तो राम लाल को आता ही नहीं था | देखते ही देखते पूरी नाव नमक से भर गयी और भार ज्यादा होने के कारण पूरी नाव पानी में डूब गयी और सारे पानी में डूब कर मर गये |

माना जाता है कि वह चक्की आज भी चल रही है | शायद इसीलिए सागर का पानी खारा होता है और उधर श्याम लाल के पास धन ही धन इक्कठा हो गया और वह अपने परिवार सहित ख़ुशी ख़ुशी रहने लगा |

शिक्षा : लालच बुरी बला है |

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