Table of Contents
Mere Mehboob Qyamat Hogi shayari in Hindi

मेरे महबूब कयामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों से मोहब्बत होगी
मेरे दिल की गहराइयो से यूँ
बेगाना बन कर निकल गए
जैसे तेरे और मेरे दिल की
कभी कोई पहचान ही न हो जैसे
मेरे महबूब कयामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों से मोहब्बत होगी|
जो मिल गए तुम कहीं राहो में
पूछूंगी तुमसे बेवफाई की वजह
ऐसे पल में क्यों बेगाना बना दिया
ऐसे पल भर में नजरो से क्यों हटा दिया
आज मेरी नज़रे गिला करती है तुमसे
मेरे महबूब कयामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों से मोहब्बत होगी |
सोचा न था कि प्यार की ऐसी भी सज़ा पाउंगी
ज़िन्दगी भर किसी को अपना कहने के लिए यूँ तरस जाउंगी
सोचा न था कि ऐसा भी मिलेगा प्यार का सिला
कि प्यार लफ्ज़ ही एक पहेली बन कर रह जाएगी
मेरे महबूब कयामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों से मोहब्बत होगी |
अफ़सोस तो ये है कि मुझे समझ न पाए तुम
सारी दुनिया को छोड़ मान लिया था मैंने अपना
न जाने किस बात की सजा तुमसे पायी है
मेरे महबूब कयामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों से मोहब्बत होगी |
मेरे महबूब कयामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों से मोहब्बत होगी
मेरे दिल की गहराइयो से यूँ
बेगाना बन कर निकल गए
जैसे तेरे और मेरे दिल की
कभी कोई पहचान ही न हो जैसे
मेरे महबूब कयामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों से मोहब्बत होगी|
Also Read : Jaane kahan gaye vo din
