Mujhe kuch tumse hai kehna shayari

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Mujhe kuch tumse hai kehna shayari

Mujhe kuch tumse hai kehna shayari
                                                                                   Mujhe kuch tumse hai kehna shayari

 

मुझे कुछ तुमसे है कहना
दिल की गहराईयों से है कुछ सुनाना
कभी तो मिलो दिल की राहो में
सुबह या किसी सुहानी शाम में
मुझे कुछ तुमसे है कहना |

मेरे प्यार को यूँ अंजाम मिल जाए
तपती हुई धूप में वृक्ष की छाया मिल जाए
यही है मेरी ख्वाइश और यही है प्रार्थना
ज़िन्दगी में कभी भी न रहना पड़े तुम्हारे बिना
आओ बैठो कभी मेरे पास
तो दिल का हाल सुनना
मुझे कुछ तुमसे है कहना |

मेरे दिल में हो तुम
साँसों में हो तुम
कसम है तुम्हारी सिर्फ
तुम्हारे है हम
दूर ले चलो कहीं दुनिया के किसी कोने में
बताउंगी में तुम्हे कितना है तुमसे प्यार
दूर कभी भी न मुझसे रहना
मुझे कुछ तुमसे है कहना |

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