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Ramayana-राक्षसी ताड़का वध
Ramayana-राक्षसी ताड़का वध में हम राक्षसी ताड़का वध के बारे में अध्ययन करेगे | माना जाता है कि राक्षसी ताड़का में हज़ार हाथियों के जितना बल था ,जिसे कोई साधारण मानव आसानी से नहीं मार सकता था लेकिन श्री राम ने उसे मार कर सम्पूर्ण मानव जाति का कल्याण किया |
अपनी शिक्षा पूरी होने पर चारो भाई राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न अपने राज्य में वापिस आये और उनकी वीरता की प्रतिष्ठा चारो दिशायो में फ़ैल गयी | उस समय राक्षसों के राज से सम्पूर्ण मानव जाति बहुत दुखी थी | उनके कल्याण के लिए ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ के पास सहायता के लिए गये | राजा दशरथ ने महामुनि को आश्वासन दिया कि उनके राज्य की सेना उनका साथ देगी एवम उनके यज्ञ को पूर्ण करने में उनकी सहायता करेगी |
लेकिन महामुनि विश्वमित्र ने कहा कि उन्हें राजा दशरथ की सपूर्ण सेना नहीं , अपितु केवल राम चाहिए | यह सुन कर पहले तो राजा दशरथ अचंभित हो गये कि एक 16 वर्ष का बालक ताड़का जैसे महा असुरो का सामना कैसे करेगा ? लेकिन बाद में विश्वामित्र के समझाने पर कि राम का जन्म इस धरती पर असुरो का विनाश करने के लिए ही हुआ है | यह सुनकर रजा दशरथ ने अपने पुत्रो राम और लक्ष्मण को विशिष्ट के साथ असुरो के संहार के लिए भेज दिया |
जैसे ही मुनि विश्वामित्र , राम एवम लक्ष्मण उस स्थान पर पहुंचे , जहाँ ताड़का रहती थी , उस घने और डरावने जंगल को देखकर राम और लक्ष्मण ने ऋषि विश्वामित्र से पूछा -” यह इतना डरावना और घना जंगल कैसे बन गया ? पेड़ भी इतने घने और बड़े है कि सूरज की रौशनी भी धरती पर नहीं आ सकती | यह जंगल तो प्रकृति की काया से बिल्कुल भिन्न नज़र आता है | हर जगह पर बड़े बड़े पैरो के निशान है , जो किसी साधारण मानव के पैरो से बहुत परे है |
उनकी बातें सुन कर ऋषि विश्वामित्र ने कहा -” यह जो घना जंगल तुम देख रहे हो , यहाँ वास्तव में पहले दो समृद्ध राज्य हुआ करते थे , करूप और मालदा |धन धान्य से भरपूर इस राज्य में सुखी प्रजा निवास करती थी | इस समृद्ध राज्य की ऐसी परिस्थिति ताड़का ने ही की है , वह एक स्त्री नहीं है , अपितु एक राक्षसी है , जिसने इस सुदर राज्य को भयानक जंगल में तब्दील कर दिया है |यहाँ पर कोई भी प्राणी नहीं आ सकता और यदि वो गलती से आ भी जाता है तो यहाँ से जिन्दा वापिस नहीं जा सकता |
उस राक्षसी में हज़ार हाथियों जितना बल है ,उसे परास्त करना आसान नहीं है | इसीलिए तुम दोनों को मै यहाँ ले कर आया हूँ , ताकि उस राक्षसी का वध किया जा सके | श्री राम ने आश्चर्य चकित होकर पूछा -“हे मुनिवर ! स्त्री तो सदेव कोमल हृदय एवम त्याग की भावना से भरपूर होती है और यह स्त्री इतनी क्रूर भाव की कैसे ?”ऋषिवर ने बताया कि वास्तव में ताड़का के पिता सुकेतु यक्ष के कोई संतान नहीं थी , उसने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या करके संतान की प्राप्ति की और उसने अपनी संतान में हज़ार हाथियों जितना बल माँगा | ब्रह्मा जी ने उसकी यह मनोकामना भी पूर्ण कर दी |
ताड़का का विवाह सुन्द नाम के राक्षस के साथ हुआ और सुबाहु एवम मारीच नाम के दो बालक उनके घर जन्मे , लेकिन मारीच राक्षस घर में जन्म लेने के बावजूद भी राक्षस नहीं था | परन्तु पराक्रमी के साथ साथ उपद्बरवी भी था , वह ऋषि मुनियों का बहुत नष्ट करता था | एक बार ऋषि अगस्त्य ने उसे राक्षस बनने का श्राप दे दिया , जिसे उसका पिता बर्दाश्त नहीं कर पाया और ऋषि आगस्त्य पर हमला करने के लिए गया |ऋषि अगस्त्य ने उसे भी भस्म कर दिया | बस तभी से ताड़का ने इस सुंदर वन को भयानक वन में तब्दील कर दिया और सपूर्ण मानव जाति से बदला ले रही है |
इसीलिए यदि तुम आज इसका संहार करते हो तो उसे अपनी शापित ज़िन्दगी से भी मुक्त कर देते हो तो इसीलिए हे राम ! मेरी यही आज्ञा है कि तुम सूरज ढलने से पहले इसका संहार कर दो , ताकि सूरज ढलने पर इसकी शक्तियां दौगुनी न हो पाए |
श्री राम ने ऐसा ही किया | अपने नए शस्त्र टंकार की सहायता से ताड़का का वध करने में सफल हो गये | इससे प्रसन्न होकर मुनि विश्वामित्र ने उन्हें अनेक प्रकार के दिव्यास्त्र प्रदान किये |
