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Why we celebrate April fools day
प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को केवल भारत में ही नहीं अपितु पूरे संसार में अप्रैल फूल डे मनाया जाता है | इस दिन लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बेवकूफ बनाते हैं और उनका मजाक उड़ाते हैं लेकिन कोई भी उस दिन एक दूसरे के किए गए मजाक का बुरा नहीं मानता है ,लेकिन क्याआप जानते हैं कि अप्रैल फूल्स डे क्यों मनाया जाता है तो आइए आज हम इस लेख में यह जानते हैं कि अप्रैल फूल्स डे का क्या इतिहास है और यह संसार के विभिन्न देशों में किस तरह से मनाया जाता है?
History of April fools day
अप्रैल फूल्स डे मनाने के पीछे अलग अलग मान्यताये है , इसका कोई ठोस सबूत तो नहीं है ,लेकिन दुनिया के अलग-अलग देशों में इस दिन को मनाने के अलग अलग तरीके हैं -जैसे फ्रांस, इटली व बेल्जियम मैं लोगों के पीठ पर कागज की मछली चिपकाने का रिवाज है | इसे अप्रैल फिश भी कहते हैं, लेकिन एक बात हर जगह सामान है कि दूसरो को बेवकूफ बना कर उन पर हँसना |
जुलियन कैलेंडर से ग्रेगोरियन कैलेंडर की स्थापना
इस दिन का कोई ठोस सबूत न मिलने के कारण अलग अलग मान्यताएं है , जिसमें कुछ इतिहासकार बोलते हैं कि प्राचीन काल में रोमन लोग अप्रैल में अपने नए वर्ष की शुरुआत करते थे तो वही मध्यकालीन यूरोप में 25 मार्च को नववर्ष के उपलक्ष्य में एक उत्सव भी मनाया जाता था लेकिन 1852 में पोप ग्रेगरी अष्टम ने ग्रेगोरियन कैलेंडर की घोषणा की जिसके आधार पर जनवरी से नए वर्ष की शुरुआत की गई|
फ्रांस द्वारा इस कैलेंडर को सबसे पहले स्वीकार किया गया| जनश्रुति के आधार पर यूरोप के लोगों ने जहां इस कैलेंडर को स्वीकार नहीं किया तो वहीं कई लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं थी , जिसके चलते नए कैलेंडर के आधार पर नववर्ष मनाने वाले लोग पुराने तरीके से अप्रैल में नव वर्ष बनाने वाले लोगों को मूर्ख मानने लगे और तभी से अप्रैल फूल या मूर्ख दिवस पर चलन बढ़ता चला गया|.
प्राचीन रोम का हिलेरिया नामक त्यौहार
हिलेरिया नामक त्यौहार प्राचीन रोम के द्वारा मनाया जाने वाला त्यौहार था , हिलेरिया यानि आनंदपूर्ण और joyful . इस दिन लोग दूसरे इंसान का वेश बनाकर दूसरो का मजाक उड़ाते है |
इंग्लैण्ड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी की सगाई
चॉसर के कैंटरबरी टेल्स (1392) की एक कहानी नन्स प्रीस्ट्स टेल के मुताबिक इंग्लैण्ड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी की सगाई की तारीख 32 मार्च घोषित कर दी गई जिसे वहां की जनता ने सच मान लिया और मूर्ख बन बैठे। तब से 32 मार्च यानी 1 अप्रैल को अप्रैल फूल डे के रूप में मनाया जाता है।
अन्य रोचक कहानियां
1539 में फ्लेमिश कवि ‘डे डेने’ ने एक अमीर आदमी के बारे में लिखा, जिसने 1 अप्रैल को अपने नौकरों को मूर्खतापूर्ण कार्यों के लिए बाहर भेजा।
1 अप्रैल 1698 को कई लोगों को ‘शेर की धुलाई देखने’ के लिए धोखे से टॉवर ऑफ लंदन में ले जाया गया।
लेखक कैंटरबरी टेल्स (1392) ने अपनी एक कहानी ‘नन की प्रीस्ट की कहानी’ में 30 मार्च और 2 दिन लिखा, जो प्रिंटिंग में गलती के चलते 32 मार्च हो गई, जो असल में 1 अप्रैल का दिन था। इस कहानी में एक घमंडी मुर्गे को एक चालाक लोमड़ी ने बेवकूफ बनाया था। इस गलती के बाद कहा जाने लगा कि लोमड़ी ने एक अप्रैल को मुर्गे को बेवकूफ बनाया।
वहीं, अंग्रेज़ी साहित्य के महान लेखक ज्योफ्री चौसर का ‘कैंटरबरी टेल्स (1392)’ ऐसा पहला ग्रंथ है जहां एक अप्रैल और बेवकूफी के बीच संबंध का ज़िक्र किया गया था।
How to celebrate April fools day
अप्रैल फूल मनाने का खासतौर से युवा इंतजार करते हैं। अपनों को बेवकूफ बनाने के लिए ढेर सारी तैयारियां करते हैं। सामने वाली की कमजोरी देखकर उसके साथ उसी तरह का मजाक किया जाता है। दूसरों को उल्लू बनाने के लिए युवा अब सोशल साइटों का जमकर प्रयोग करते हैं।
अप्रैल फूल्स डे मानते हुए किन बातो का रखना चाहिए ध्यान
मजाक कई बार लोगों के दिल पर लग जाता है। कई बार कई लोगों के जान पर बन आती है। मनो चिकित्सक डॉ. अभिषेक चौहान ने कहा कि मजाक को दिल पर लेने से इनसान एक्यूट स्ट्रेस में जा सकता है। किसी करीबी को नुकसान पहुंचने की सूचना से शरीर में कई हारमोन में बदलाव आ जाते हैं। इससे बेचैनी, चेहरे पर पसीना आने, चक्कर या बेहोश छाने और धड़कन बढ़ जाने जैसे लक्षण आ सकते हैं। हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए सामान्य मजाक करना चाहिए।
